गंगा का जलस्तर बढ़ा, वाराणसी में फिर संकट – घाट डूबे, गलियों में घुसा पानी

मानसून के बीच गंगा एक बार फिर रौद्र रूप में है। बुधवार सुबह गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर 70.36 मीटर तक पहुँच गया। यह स्तर तय चेतावनी सीमा से करीब 10 सेंटीमीटर अधिक है। लगातार बढ़ते पानी ने घाटों को डुबो दिया है और अब गलियों व सड़कों तक फैलने लगा है। नतीजा यह है कि तटवर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। पिछले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर लगभग दो मीटर बढ़ा है। 

बुधवार को भी पानी तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से ऊपर चढ़ता रहा। घाट डूबने से न केवल दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हुईं, बल्कि शवदाह की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। मणिकर्णिका घाट पर किसी तरह चिताएँ जलाई जा रही हैं, वहीं हरिश्चंद्र घाट पर पानी गलियों तक पहुँचने के कारण शवदाह में कठिनाई आ रही है। डोम राजा परिवार से जुड़े विक्रम चौधरी ने कहा कि यह हर साल की समस्या है, जिस पर प्रशासन को स्थायी समाधान खोजना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि शवदाह स्थल पर लोहे का प्लेटफार्म बनाया जाए ताकि परंपरागत प्रक्रिया बिना बाधा पूरी हो सके।गौरतलब है कि अगस्त के शुरुआती दिनों में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। उस समय हजारों परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ा था। बाद में पानी घटने पर लोग लौटे और नगर निगम ने सफाई अभियान चलाया। मगर अब गंगा दोबारा उफान पर है, जिससे वाराणसी के निचले इलाके एक बार फिर जलमग्न होने लगे हैं।

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