पीएम मोदी की डिग्री जानकारी अब रहेगी गोपनीय, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री को सार्वजनिक करने संबंधी केंद्रीय सूचना आयोग CIC के आदेश को रद्द कर दिया है। यह मामला वर्ष 2016 से चल रहा था, जब नीरज नामक व्यक्ति ने एक आरटीआई दायर कर 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के अभिलेखों की जानकारी मांगी थी।सीआईसी ने दिसंबर 2016 को इस आरटीआई पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि विश्वविद्यालय अभिलेखों का निरीक्षण करने की अनुमति दे। उसी वर्ष नरेंद्र मोदी ने भी स्नातक की परीक्षा पास की थी, जिसके चलते उनकी डिग्री सार्वजनिक होने का रास्ता खुल सकता था।

इसके खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और तर्क दिया था कि इस तरह की जानकारी को सार्वजनिक करना निजता का उल्लंघन है तथा शैक्षणिक अभिलेख गोपनीय श्रेणी में आते हैं।हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने विश्वविद्यालय की दलीलें स्वीकार करते हुए कहा कि सीआईसी का आदेश सही नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। न्यायालय ने 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था और यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।इस फैसले के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यह निर्णय न केवल कानूनी रूप से बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि मोदी की डिग्री लंबे समय से विपक्षी दलों के बीच विवाद और सवालों का विषय रही है।

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