राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में चल रहे संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के तहत वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों में विजया दशमी उत्सव और पथ संचलन का आयोजन किया गया। इसी क्रम में ओंकारेश्वर नगर स्थित लाट भैरव शाखा समेत कई बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने पारंपरिक गणवेश में भाग लिया।लाट भैरव शाखा का पथ संचलन बना आकर्षण ओंकारेश्वर नगर की लाट भैरव शाखा का पथ संचलन सुबह निकाला गया। स्वयंसेवक पारंपरिक वेशभूषा में अनुशासन के साथ कदमताल करते हुए गणगीत गाते हुए आगे बढ़े। मार्ग में लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। पथ संचलन कज्जाकपुरा स्थित रामबाग से प्रारंभ होकर पीलीकोठी दुर्गा मंदिर पर आकर संपन्न हुआ।शक्ति की उपासना से ही राष्ट्र सशक्त बनता है” इस अवसर पर काशी मध्य भाग सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख प्रभात ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। समाज की सज्जन शक्तियां जब संगठित होती हैं तो राष्ट्रहित में निर्णायक परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने कहा कि संघ की सौ वर्ष की गौरवगाथा स्वयंसेवकों के पुरुषार्थ और समर्पण का परिणाम है।
शहर के विभिन्न शाखाओं से भी निकला संचलनराजघाट, प्रहलाद घाट, गंगानगर, गायघाट और मछोदरी शाखाओं से भी पथ संचलन निकाले गए। सभी संचलन भगवा ध्वज के नेतृत्व में अनुशासित पंक्तियों में हुए, जहां स्वयंसेवकों ने एकता, अनुशासन और राष्ट्रभाव का संदेश दिया।जनभागीदारी से सजा आयोजनपथ संचलन के दौरान जलालीपुरा, तेलियाना, हनुमान फाटक, बलुआबीर, अंबियामंडी और हरतीरथ मार्गों पर लोगों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पूरे आयोजन में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण रहा।

