काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में संस्कृत विभाग और विश्व संवाद केंद्र (काशी) द्वारा आयोजित काशी शब्दोत्सव 2025’ में मुख्य अतिथि आचार्य मिथिलेश नन्दिनीशरण महाराज ने भारतीय संस्कृति, शब्द-संपदा और काशी की परंपरा पर विचार रखे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि काशी के अर्थों में ‘उत्सव’ निहित है, लेकिन आज उत्सव कम होते जा रहे हैं।
उन्होंने ‘शब्दोत्सव’ की अवधारणा पर बोलते हुए कहा, “शब्द जब तक जीवित रहेगा, तभी उत्सव बना रहेगा। काशी वह भूमि है जहां बुद्ध और शंकराचार्य दोनों को एक साथ स्थान मिलता है। यहां की गुणवत्ता केवल चंदन–कमंडल में नहीं, बल्कि चांडाल के शब्दों में भी झलकती है। काशी में गुरु का शब्द उच्चारण प्रतिदिन एक उत्सव की तरह होता है।”कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएं, अध्यापक व शोधार्थी उपस्थित रहे। काशी शब्दोत्सव 2025 का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, शब्द परंपरा और काशी की आध्यात्मिक विरासत का प्रसार करना रहा।
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