जिले के प्रसिद्ध उलेमा कारी इसहाक़ ने मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल को समाज और परिवारों के बिखराव की बड़ी वजह बताया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल ने इंसान को उसके अपने ही घर में पराया बना दिया है। पहले लोग परिवार के साथ बैठकर बातें करते थे, खुशियाँ और दुख साझा करते थे, लेकिन अब हर कोई मोबाइल में इतना खो गया है कि पास बैठे व्यक्ति से भी बातचीत करना मुश्किल हो गया है। कारी इसहाक़ ने कहा कि खासतौर पर महिलाएं मोबाइल पर सबसे अधिक निगेटिव बातें करती हैं, जिससे घरों में तनाव, झगड़े और दूरियां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने इसे एक खतरनाक सामाजिक प्रवृत्ति बताया।
कारी इसहाक़ ने आगे कहा कि मोबाइल फोन का सही उपयोग किया जाए तो यह ज्ञान और सूचना का साधन बन सकता है, लेकिन गलत दिशा में उपयोग करने से यह रिश्तों को तोड़ने का जरिया बन गया है। उन्होंने कहा कि मोबाइल के कारण पति-पत्नी के बीच झगड़े बढ़ रहे हैं, बच्चों को माता-पिता का समय नहीं मिल रहा, और सामाजिक मेलजोल घट गया है। इसने लोगों की जीवनशैली, नींद और मानसिक शांति तक छीन ली है। उन्होंने कहा कि आज लोगों के बीच दूरी सिर्फ भौतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी हो गई है, और यह स्थिति समाज के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि मोबाइल का प्रयोग सीमित और सकारात्मक उद्देश्य के लिए करें। परिवार में मोबाइल-मुक्त समय तय करें, ताकि एक-दूसरे के साथ समय बिताया जा सके और संवाद फिर से जीवित हो। कारी इसहाक़ ने कहा कि अगर समय रहते लोग नहीं चेते, तो मोबाइल आने वाले समय में रिश्तों को और कमजोर कर देगा। उन्होंने समाज को जागरूक करते हुए कहा कि “मोबाइल हमारे लिए बना है, हम उसके गुलाम न बनें।”

