संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में एक भव्य और अत्याधुनिक म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह हाईटेक म्यूजियम लगभग 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित किया जाएगा। म्यूजियम का उद्देश्य संत रविदास के जीवन, विचारों और उनके आदर्श समाज “बेगमपुरा” की परिकल्पना को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुंचाना है।म्यूजियम में 15वीं शताब्दी का जीवंत एंबियंस तैयार किया जाएगा। उस दौर की वेशभूषा, वस्तुएं, सामाजिक परिवेश और संगीत के जरिए संत रविदास के कालखंड को सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से श्रद्धालु गुरु रविदास के पद, वाणी और उपदेशों को सुन और महसूस कर सकेंगे।
म्यूजियम की सबसे खास विशेषता यह होगी कि यहां संत रविदास द्वारा कहे गए दोहे और चौपाइयों का संगीतबद्ध पाठ सुनाई देगा। जैसे ही श्रद्धालु विभिन्न दीर्घाओं में प्रवेश करेंगे, गुरु रविदास के अमर वचन मधुर संगीत के साथ गूंजेंगे। साथ ही, उनके अर्थ और संदर्भ को सरल भाषा में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उनके विचारों को आसानी से समझ सकें।संत रविदास जयंती से पहले इस म्यूजियम के निर्माण को एक बड़े तोहफे के रूप में देखा जा रहा है। रैदासी समाज में इसे लेकर खासा उत्साह है। माना जा रहा है कि यह म्यूजियम धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
वाराणसी रविदास मंदिर के प्रबंधक रणवीर सिंह ने बताया कि संत रविदास की जन्मस्थली पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। म्यूजियम बनने के बाद श्रद्धालुओं को संत रविदास के जीवन, संघर्ष और सामाजिक समरसता के संदेश को गहराई से जानने का अवसर मिलेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।संत रविदास के जन्मोत्सव पर सीर गोवर्धनपुर में हर साल वीवीआईपी और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां यहां दर्शन कर चुकी हैं। म्यूजियम के निर्माण से काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, संत रविदास की जन्मस्थली पर बन रहा यह हाईटेक म्यूजियम आस्था, इतिहास और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम होगा, जो आने वाले समय में काशी की आध्यात्मिक पहचान को और अधिक समृद्ध करेगा।

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