नई दिल्ली। पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए एक व्यक्ति द्वारा 6 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ने का मामला अदालत तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह फिलहाल बेरोजगार है और उसकी कोई नियमित आय नहीं है, इसलिए उस पर भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव और पूर्व आय को रिकॉर्ड पर लिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी सक्षम और उच्च योग्य व्यक्ति जानबूझकर रोजगार छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता।
केवल नौकरी छोड़ देना या आय शून्य दिखाना भरण-पोषण से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता।अदालत ने कहा कि पति की “कमाई करने की क्षमता” को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि यह साबित होता है कि नौकरी छोड़ने का उद्देश्य पत्नी को गुजारा भत्ता न देना था, तो इसे दुर्भावनापूर्ण माना जाएगा।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने पति की दलीलों को खारिज करते हुए पत्नी को गुजारा भत्ता देने काश बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का निर्धारण केवल वर्तमान आय नहीं, बल्कि व्यक्ति की योग्यता, अनुभव और संभावित कमाई के आधार पर भी किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि वैवाहिक दायित्वों से बचने के लिए आय छिपाने या नौकरी छोड़ने जैसे कदम अदालत में स्वीकार्य नहीं होंगे।यह निर्णय ऐसे मामलों में नजीर माना जा रहा है, जहां जानबूझकर आर्थिक स्थिति कमजोर दिखाकर भरण-पोषण से बचने की कोशिश की जाती है।

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