आज़ाद अधिकार सेना ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में एक साथ सभाएं आयोजित कर मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज को संबोधित सामूहिक ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किया। यह ज्ञापन 19 दिसंबर 2025 को वाराणसी स्थित विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय परिसर में हुई एक गंभीर घटना के संबंध में दिया गया है, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पेशी के समय काशी जोन के डीसीपी गौरव बंसवाल के नेतृत्व में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने न्यायालय कक्ष के भीतर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और अमिताभ ठाकुर को अपनी वैधानिक बात रखने से रोका गया। आरोप है कि उन्हें बलपूर्वक न्यायालय कक्ष से बाहर ले जाया गया तथा न्यायालय परिसर के बाहर मीडिया को घटनाक्रम सुनने से रोकने के उद्देश्य से सीटी बजाने जैसी गतिविधियां की गईं। संगठन का कहना है कि यह आचरण न केवल न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है, बल्कि न्यायालय की गरिमा और पारदर्शिता पर भी सीधा आघात है।आज़ाद अधिकार सेना ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यह कृत्य क्रिमिनल कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इससे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न हुई और अधीनस्थ न्यायालय की गरिमा को गंभीर क्षति पहुंची।
संगठन ने माननीय उच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Moto Cognizance) लेने, संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्यवाही प्रारंभ करने, दोषी पाए जाने पर कठोर दंड सुनिश्चित करने तथा भविष्य में न्यायालय परिसरों में पुलिस द्वारा इस प्रकार के आचरण की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।आज़ाद अधिकार सेना ने कहा कि वह न्यायिक स्वतंत्रता, न्यायालयों की गरिमा और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा इस गंभीर विषय पर उच्च न्यायालय से त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अपेक्षा करती है।

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