नदेसर स्थित होटल ताज में शुक्रवार को बनारस लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात अभिनेता अनुपम खेर के कर-कमलों से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस मौके पर काशी की साहित्यिक फिज़ा में सृजन, स्मृति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंच पर उजास केवल दीपों का नहीं था, बल्कि अनुभव, संघर्ष और प्रेरणा का भी था।उद्घाटन सत्र में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत “चोला टाइगर्स: द एवेंजर्स ऑफ सोमनाथ” नाटक ने वीरता, त्याग और देशभक्ति की भावना को जीवंत कर दिया। अनुपम खेर ने बच्चों के मंचन की प्रशंसा करते हुए अपने स्कूल के पहले नाटक की यादें साझा कीं। उन्होंने हँसते हुए बताया कि उनके अभिनय जीवन की शुरुआत कैसे मासूम तर्क और पहली भूमिका से हुई।
कार्यक्रम के अंत में अनुपम खेर ने छात्रों के साथ आत्मीय संवाद किया, उनके प्रश्नों के उत्तर दिए और स्मृति स्वरूप फोटो भी खिंचवाई। बच्चों के लिए यह क्षण प्रेरणा का स्थायी दीप बन गया।बीएलएफ के अध्यक्ष दीपक मधोक ने स्वागत भाषण में कहा कि काशी जैसा शहर साहित्य, धर्म, संस्कृति और संस्कार का संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि इस साल फेस्टिवल में 167 सेलिब्रिटीज और 50 से अधिक देशों के दर्शक शामिल हैं। बीएलएफ के सचिव बृजेश सिंह ने फेस्टिवल के उद्देश्य और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।नेपाल से आए विशेष अतिथि विनोद चौधरी ने काशी और नेपाल के अटूट संबंधों की महत्ता को रेखांकित किया। वहीं, प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव और पंडित चंद्रमौली उपाध्याय ने काशी की जीवनशैली, संस्कृति और फेस्टिवल की कठिन तैयारियों की प्रशंसा की।
उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन के मुख्य अतिथि अनुपम खेर, नेपाल के विनोद चौधरी, डॉ. नीरजा माधव, डॉ. चंद्रमौली उपाध्याय, प्रतीक द्विवेदी, खालिद अंसारी, बीएलएफ अध्यक्ष दीपक मधोक, सचिव बृजेश सिंह, पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास, पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, शीन काफ निज़ाम, अशोक कपूर सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार और कलाकार उपस्थित रहे।सत्र के दौरान दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। इसमें सीआरपीएफ के डीआईजी निशित कुमार की पुस्तक ‘द बेंगलोर कांसेप्ट’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। लेखक ने अपनी पुस्तक की विषय-वस्तु और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।बीएलएफ–4 के आयोजन के दौरान 61 हजार बुक मार्क का प्रदर्शन भी किया गया। यह एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया, जिसमें विभिन्न शहरों और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों द्वारा बनाए गए बुक मार्क शामिल थे। चुनिंदा बुक मार्क मंचासीन अतिथियों को प्रदान किए गए, जिन्होंने अपनी भावनाएँ और विचार व्यक्त किए।कुल मिलाकर, बीएलएफ–4 का उद्घाटन सत्र केवल एक समारोह नहीं, बल्कि यह संदेश था कि साहित्य, रंगमंच और जीवन की जड़ें स्मृति, श्रम और संवेदना से गूँथी हुई हैं। काशी की धरती पर यह आयोजन सृजनात्मक चेतना और सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव बनकर गूँज रहा है।

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