काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में बृहस्पतिवार की दोपहर बाद जातिगत टिप्पणी को लेकर छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। इसमें तीन छात्र घायल हो गए, जिनमें रूईया हॉस्टल के पीजी छात्र का सिर फट गया और उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।जानकारी के अनुसार, मामूली कहासुनी से उपजा विवाद तेजी से रूईया और बिरला हॉस्टल के छात्रों के बीच फैल गया। इसमें छात्रों ने ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला किया, और स्थिति इतनी बिगड़ी कि सुरक्षाकर्मियों पर भी पथराव हुआ।
घटना को विश्वविद्यालय प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम नियंत्रित नहीं कर सकी, जिसके बाद पुलिस और पीएसी के जवान मौके पर पहुंचे और मोर्चा संभाला।देर शाम तक हॉस्टलों में सर्च अभियान चलाया गया। बिरला सी हॉस्टल के करीब 10 कमरे खाली पाए गए और उन्हें सील कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इन कमरों में बाहरी युवक रहते थे।इस दौरान बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर के बाहर छात्रों के एक गुट ने समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाया, जबकि अन्य छात्रों ने नए कानून के विरोध में विरोध मार्च निकाला और इसे छात्र विरोधी बताया। रूईया हॉस्टल के संस्कृत ब्लॉक के पास से गुजर रहे एक छात्र की कुछ छात्रों से जाति को लेकर बहस हुई, जिसके बाद पीयूष तिवारी को पीटा गया।
स्थिति बिगड़ते ही बड़ी संख्या में छात्रों ने रूईया हॉस्टल जाने वाले रास्ते पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस और प्रॉक्टोरियल बोर्ड को भी हेलमेट पहनकर बचाव करना पड़ा। चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया ने पुलिस अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद कैंपस में छह थानों की फोर्स ने मोर्चा संभाला और छात्रों को हॉस्टलों में खदेड़ा।एक मौका ऐसा भी आया जब नवनियुक्त चीफ प्रॉक्टर आपा खो बैठे। उन्होंने हेलमेट पहनकर हाथ में डंडा लेकर छात्रों को समझाने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसे वरिष्ठ सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। बाद में चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि तीनों छात्रावासों से बाहरी युवकों को बाहर किया गया और खुले कमरों की जांच कराई जा रही है। उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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