केदारनाथ–बद्रीनाथ समेत चारधाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर लग सकती है रोक, BKTC बोर्ड बैठक में आएगा प्रस्ताव

उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों केदारनाथ, बद्रीनाथ और यमुनोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लग सकती है। बद्रीनाथ-केदारनाथ टेंपल कमेटी (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री वर्जित करने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में लाया जाएगा।हेमंत द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन जरूरी है और इसी उद्देश्य से मंदिर समिति यह प्रस्ताव लाने जा रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह फैसला लागू नहीं हुआ है, बल्कि अभी यह प्रस्तावित निर्णय के तौर पर सामने आया है।यह बयान ऐसे समय आया है, जब देशभर से श्रद्धालु चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटे रहते हैं। हर साल बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक की संभावित घोषणा को लेकर यात्रियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो जाता है, तो क्या तुरंत गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकी जा सकेगी। इसका जवाब उस कानून में छिपा है, जिसके तहत मंदिर समिति का गठन हुआ है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट, 1939 के तहत किया गया था। यह अधिनियम मंदिरों के प्रशासन, संचालन और व्यवस्था से जुड़े अधिकार समिति को देता है।1939 के अधिनियम के अनुसार, समिति को बायलॉज बनाने का अधिकार है, जिनके जरिए मंदिरों में प्रवेश और संचालन से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी भी बायलॉज को प्रभावी बनाने के लिए उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रकाशित करना और राज्य सरकार की पुष्टि जरूरी होती है। ऐसे में केवल प्रस्ताव पास होना ही अंतिम कदम नहीं होगा।

श्रद्धालुओं की संख्या को देखें तो यह मुद्दा पूरे देश से जुड़ा है। 2025 के यात्रा सीजन में केदारनाथ धाम में करीब 16,56,539 श्रद्धालु, जबकि बद्रीनाथ धाम में लगभग 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। ये आंकड़े बताते हैं कि दोनों धामों से जुड़ा कोई भी निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।फिलहाल स्थिति यह है कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव आना बाकी है। ऐसे में यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि प्रस्ताव पास होने के बाद इसे किस प्रक्रिया के तहत और किस रूप में लागू किया जाता है, और राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।



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