शास्त्रार्थ महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं 82वें स्थापना दिवस समारोह का समापन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी शामिल हुए।अपने संबोधन में डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारे जीवन, संस्कृति और सभ्यता की मूल आधार भाषा है। वेद, उपनिषद, गीता, रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का विद्वान सदैव समाज और मानवता की भलाई के बारे में सोचता है तथा संस्कृत भाषा का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत महाविद्यालयों द्वारा इस प्रकार के आयोजन संस्कृति के संरक्षण और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सारस्वत अतिथि के रूप में केंद्रीय तिब्बती संस्थान के आचार्य प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने कहा कि शास्त्रार्थ महाविद्यालय संस्कृत जगत का गौरव है और यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी पूरे देश में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने ज्योतिष शास्त्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विज्ञान में शास्त्र का ज्ञान आवश्यक है और ज्योतिष कोई साधारण विषय नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रह-नक्षत्रों की गति और उनके प्रभाव का अध्ययन ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत किया जाता है, जिसे वैदिक परंपरा में वेदांग भी कहा गया है। उन्होंने राशि चक्र के तत्व—अग्नि, पृथ्वी, वायु और जल—का मानव व्यक्तित्व पर प्रभाव भी बताया।संगोष्ठी के चतुर्थ सत्र में डॉ. अमोद दत्त शास्त्री, आचार्य संजय उपाध्याय, आचार्य सुनील मिश्र, डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी और आचार्य विकास दीक्षित ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में 13 विद्वानों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्राचार्य डॉ. ब्रह्मानंद शुक्ल, डॉ. शिवमणि मिश्र, डॉ. सुभाष गुप्ता, गिरीश ठाकुर, बंशीधर दूबे, डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र, रामेश्वर ओझा, आचार्य बैजनाथ द्विवेदी, डॉ. देवदूत, पंडित कन्हैया त्रिपाठी, शिव नारायण द्विवेदी, धीरज मिश्र और संजीव तिवारी शामिल रहे।इसके बाद विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।कार्यक्रम का संचालन संस्था के निदेशक डॉ. गणेश दत्त शास्त्री और प्राचार्य डॉ. पवन कुमार शुक्ल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक पाण्डेय ने दिया। इस अवसर पर डॉ. सारनाथ पाण्डेय, डॉ. विनोद राव पाठक, डॉ. शशिकांत उपाध्याय, डॉ. श्रीराम पाण्डेय, प्रो. जयप्रकाश नारायण त्रिपाठी, डॉ. अभिषेक मिश्र, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. महिनारायण पाठक और पंडित कमलाकांत उपाध्याय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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