कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने बताया कि छुट्टी के दिनों में ECHS बंद रहने के कारण बीमार पूर्व सैनिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सवाल उठाया गया कि क्या पूर्व सैनिक केवल कार्यदिवस में ही बीमार पड़ सकते हैं? छुट्टी के दिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर न तो रेफरल मिलता है और न ही इलाज की कोई स्पष्ट व्यवस्था रहती है।चौबेपुर (शिवदहा) निवासी भूतपूर्व सैनिक कन्हैया सिंह की रात करीब 1:35 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें ECHS से संबद्ध शुभम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रेफरल न होने के कारण इलाज से मना कर दिया गया। ECHS बंद होने की वजह से रेफरल न मिलने पर परिजनों को मजबूरन उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।इसी तरह हवलदार ए. के. पाण्डेय की पत्नी के पैर में फ्रैक्चर हो गया। इंपैनल अस्पताल में रेफरल के बावजूद केस को “बड़ा” बताकर अप्रूवल में देरी की गई।
वहीं भूतपूर्व सैनिक ताजबली यादव की पत्नी के पैर फ्रैक्चर के ऑपरेशन के लिए अप्रूवल न मिलने के कारण चार दिनों तक उन्हें असहनीय दर्द सहना पड़ा, जिसके बाद इलाज शुरू हो सका।सबसे दुखद मामला रामनगर निवासी भूतपूर्व सैनिक रामपति का सामने आया। वे लखनऊ के वेदांता अस्पताल में भर्ती थे, जहां डॉक्टरों ने हार्ट सर्जरी की सिफारिश की थी, लेकिन ECHS से समय पर अप्रूवल नहीं मिला। हालत बिगड़ने पर 31 दिसंबर 2025 को अस्पताल में ही उनका निधन हो गया।पूर्व सैनिकों ने यह भी बताया कि छुट्टी के दिन बाहर से खरीदी गई दवाओं का क्लेम नए सर्टिफिकेट के अभाव में नहीं मिलता। ECHS की स्थिति अब राशन की दुकान जैसी हो गई है—छुट्टी है तो बंद, जरूरत है तो अप्रूवल का इंतजार।
कई आवश्यक जांचें इंपैनल में शामिल न होने से समस्याएं और बढ़ जाती हैं।कार्यक्रम में जोरदार तरीके से सवाल उठाया गया कि इन समस्याओं का जवाब कौन देगा—ECHS रीजनल सेंटर, प्रशासन या कोई और? क्या पूर्व सैनिकों को इसी तरह व्यवस्था की बलि चढ़ाया जाता रहेगा?इस अवसर पर जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, जिला उपाध्यक्ष ए. के. पाण्डेय सहित राघवेन्द्र प्रताप सिंह, विभूति तिवारी, नागेन्द्र सिंह, कुंदन सिंह, अमरेश कुमार राय, विपिन सिंह, अजय कुमार तिवारी, संतोष कुमार राय और राम बहादुर सिंह समेत बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मौजूद रहे।इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की कि ECHS व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए और छुट्टी के दिनों में भी प्रभावी चिकित्सा सुविधा तथा त्वरित अप्रूवल सिस्टम लागू किया जाए, ताकि देश की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

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