लखनऊ उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों के टलने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। अब ये चुनाव अप्रैल–मई 2026 में होने के बजाय वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद कराए जा सकते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जनगणना और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया को बताया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जनगणना के आंकड़े आने के बाद ही पंचायतों का नया परिसीमन और आरक्षण तय किया जाना है। मौजूदा परिसीमन की वैधता समाप्त हो चुकी है, ऐसे में बिना नई जनगणना के पंचायत चुनाव कराना कानूनी रूप से मुश्किल माना जा रहा है।राज्य निर्वाचन आयोग भी इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार और राज्य शासन से दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।
यदि समय पर जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो पंचायत चुनावों को विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाने की संभावना है।पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति में सरकार प्रशासक नियुक्त कर सकती है। हालांकि, चुनाव टलने को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठा रहा है।

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