शंकराचार्य मामले को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब प्रयागराज के वरिष्ठ अधिकारी बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी मौके पर मौजूद पत्रकारों ने उन्हें कड़े सवालों के घेरे में ले लिया। “भाग क्यों रहे हैं, जवाब दीजिए” जैसे तीखे सवालों के साथ पत्रकारों ने अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब पत्रकारों के लगातार सवालों के बीच जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर को वापस लौटना पड़ा और मीडिया के सवालों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों से मामले में अब तक की कार्रवाई, प्रशासनिक जिम्मेदारी और आगे की रणनीति को लेकर सवाल किए गए।
इस दौरान यूपी के पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी पेशेवर दृढ़ता का परिचय दिया और अधिकारियों पर जवाब देने का दबाव बनाए रखा। पत्रकारों का कहना था कि जनहित से जुड़े गंभीर मामलों में प्रशासन की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और पारदर्शिता जरूरी है।घटना के बाद यह मामला मीडिया और प्रशासन के बीच जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई अलग से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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