अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने देश की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। तालिबान सरकार द्वारा क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट के तहत नया निर्देश जारी किया गया है, जिसके अनुसार अब देश में मुस्लिम धर्मगुरुओं (मौलवियों) के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि यदि कोई मौलवी किसी अपराध में संलिप्त भी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ न तो मामला दर्ज होगा और न ही उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि मौलवियों को आपराधिक मामलों में कानूनी छूट दी गई है।इस फैसले के बाद अफगानिस्तान में न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की ओर से इस कदम को लेकर चिंता जताई जा रही है, हालांकि तालिबान प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अफगानिस्तान की पहले से ही विवादित न्याय प्रणाली को और जटिल बना सकता है। फिलहाल, इस नए निर्देश को देशभर की अदालतों और प्रशासनिक इकाइयों में लागू किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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