काशी में गंगा पार रेत पर आकृति की खोज की कड़ी में सैंड कलाकारों की अद्भुत कला से माँ गंगा का तट निहाल हो उठा। रविदास घाट के उस पार गंगा तट पर आयोजित “रेत पर आकृति की खोज” का 24वां वार्षिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा, जहां बालू से बनी कलाकृतियां दिनभर सजी रहीं।गुरु राम छाटपार के 82वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘राम छाटपार शिल्पन्यास’ द्वारा भारत माँ गंगा की रेत पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गंगा के विस्तृत रेत टापू पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सहभागिता के लिए रविदास घाट से नाव की व्यवस्था की गई थी।
हर वर्ष की तरह इस बार भी लगभग 400 से 500 कलाकारों ने रेत पर नवीन, प्रयोगात्मक और स्वतंत्र मूर्तिशिल्प का सृजन किया। इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी कला-दक्षता का प्रदर्शन किया, जो दर्शकों के लिए रोमांचक और प्रेरणादायी रहा।‘राम छाटपार शिल्पन्यास’ की स्थापना वर्ष 1989 में आधुनिक मूर्तिशिल्पी गुरु राम छाटपार की स्मृति में उनके शिष्यों और मित्रों द्वारा की गई थी। इस न्यास के अध्यक्ष पद्मश्री स्वर्गीय प्रो. शंखो चौधुरी रहे हैं। संस्था आधुनिक और समकालीन मूर्तिकला में नवाचार और प्रयोगों के लिए समर्पित है।
पिछले 35 वर्षों से यह संस्था राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कला कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है और कला जगत में विशेष पहचान बना चुकी है। शिल्पन्यास द्वारा भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।इस आयोजन में विशेष रूप से काशी हिंदू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला के छात्र, साथ ही गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ, प्रयागराज सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कला विद्यार्थी और काशी के कला प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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