मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में बेटे की हत्या के आरोप में सजा काट रही मां को बड़ी राहत देते हुए दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।मामला मध्य प्रदेश के एक जिले का है, जहां कुछ वर्ष पहले एक महिला पर अपने नाबालिग बेटे की हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने जांच के बाद महिला को गिरफ्तार कर लिया था और ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद महिला ने फैसले को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सबूतों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संदेह की स्थिति बनी हुई है और अभियोजन पक्ष आरोपों की कड़ी को पूरी तरह से स्थापित नहीं कर सका।न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं। केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर महिला को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।फैसले के बाद महिला की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा जहां परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई गई हो।

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