BHU लगाएगा मानव जीवन के इतिहास का पता 1 लाख DNA सैंपल वाला बायोबैंक, 22 देशों के वैज्ञानिक करेंगे सहयोग

वाराणसी, भारत: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) अब वैश्विक मानचित्र पर मानव विकास अनुसंधान के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में शामिल हो गया है। इस परियोजना का लक्ष्य मानव जीवन के इतिहास, उत्पत्ति और माइग्रेशन को डीएनए‑आधारित दृष्टिकोण से समझना है।  क्या है यह महत्त्वाकांक्षी शोध?BHU ने एक अंतरराष्ट्रीय शोध पहल में सहभागिता की है जिसका मकसद मानव प्रजाति के विकास, उसके फैलाव और आनुवंशिक विविधता को डीएनए डेटा की मदद से समझना है। इस परियोजना में लगभग 1 लाख DNA सैंपल की बायोबैंकिंग की योजना है, जिससे मानव इतिहास के अनछुए अध्यायों को उजागर किया जाएगा।  यह पहल ARC Centre of Excellence for Transforming Human Origins Research के तहत आयोजित की जा रही है, जिसका नेतृत्व ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी कर रही है। वैज्ञानिक समूह विभिन्न देशों से मिलकर इस परियोजना का संचालन करेगा। वैश्विक सहयोग: 22 देशों के 50 वैज्ञानिक इस अध्ययन में 22 से अधिक देशों के लगभग 50 वैज्ञानिक शामिल होंगे, जिनकी विशेषज्ञता में जीनोमिक्स, प्राचीन DNA अध्ययन, पुरातत्व, मानव विकास, पॉपुलेशन जेनेटिक्स और माइग्रेशन इतिहास शामिल हैं। 

वैज्ञानिकों का यह समूह मानता है कि DNA डेटा की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कहां से मानव आए, पृथ्वी पर कैसे फैले और विभिन्न वातावरणों में उन्होंने खुद को कैसे ढाला।  BHU का योगदान और भूमिका BHU के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उनके साथ कुछ अन्य विशेषज्ञ इस विशाल प्रोजेक्ट में साझेदार वैज्ञानिकों के रूप में शामिल हैं। BHU की भूमिका दक्षिण एशियाई मानव पॉपुलेशन्स के जीन इतिहास, पुरातत्व और अनुवांशिक विविधता का विश्लेषण करना है।  कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा है कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय को मानवता के साझा अतीत से जुड़े गहन वैज्ञानिक प्रश्नों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर प्रदान करेगी।  

मानव प्रजाति के विकास का विस्तृत डीएनए आधारित नक्शा तैयार करना प्राचीन माइग्रेशन पैटर्न और विविधता के कारणों को समझना मानव इतिहास के उन पहलुओं पर प्रकाश डालना जो अभी तक अज्ञात हैं वैज्ञानिकों का मानना है कि यह परियोजना न केवल मानव उत्पत्ति के अध्ययन में मील का पत्थर बनेगी, बल्कि भविष्य के जीनोमिक्स और मेडिकल शोधों में भी नई दिशा देगी।  BHU का इस शोध में शामिल होना भारत की विज्ञान और अनुसंधान क्षमताओं के लिए एक बड़ा कदम है। 1 लाख से अधिक डीएनए सैंपल के साथ तैयार होने वाला यह बायोबैंक विश्व भर के वैज्ञानिकों को मानव इतिहास को नए सिरे से समझने का अवसर देगा। 



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