।।वाराणसी।। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के मामले में कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।
क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाते हुए न्यायालय में परिवाद दायर किया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने संबंधित थाने को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।
बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
शंकराचार्य के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट के आदेश पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि:
इसी मामले में उनकी ओर से भी परिवाद दाखिल किया गया था, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हुई।
आरोप लगाने वाले व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जांच आवश्यक है।
आरोप लगाने वाला स्वयं संदिग्ध आचरण का व्यक्ति है, जिसके प्रमाण मौजूद हैं।
अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने यह भी कहा कि ऐसे समय में, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शंकराचार्य के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से चर्चा में हैं, FIR का यह आदेश कई सवाल खड़े करता है।
आगे की कानूनी रणनीति
“हम इस आदेश को कानूनी तौर पर चुनौती देंगे। पहले हाईकोर्ट जाएंगे, आवश्यकता पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। आरोप लगाने वाले व्यक्ति की जांच होना जरूरी है।”
मामले में अब पुलिस की कार्रवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजर बनी हुई है।


