नई दिल्ली:मोबाइल फोन, जो कभी ज्ञान और मनोरंजन का साधन माना जाता था, आज बच्चों के लिए सबसे खतरनाक खिलौने के रूप में सामने आ रहा है। बीते एक सप्ताह में चार नाबालिग बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ये घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, बल्कि माता-पिता और समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।विशेष रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्चों के हाथ में मोबाइल देकर अनजाने में उनका भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। आज अगर इस खतरे से सबक नहीं लिया गया, तो कल कई परिवार उजड़ सकते हैं। विशेषज्ञ इसे बच्चों के हाथ में “बारूद की डिजिटल छड़ी” बता रहे हैं, जो कभी भी बड़ा हादसा बन सकती है।हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से सामने आए पहले मामले में एक नाबालिग बच्चे की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए। शुरुआती जांच में सामने आया कि बच्चा लगातार ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया में डूबा हुआ था।
वर्चुअल दुनिया के रिश्ते उसकी असली जिंदगी पर हावी हो चुके थे। भावनात्मक दबाव बढ़ने पर बच्चा उसे संभाल नहीं पाया और यह दर्दनाक घटना घट गई।इसके बाद उत्तर प्रदेश से आई दूसरी खबर ने हर माता-पिता की नींद उड़ा दी। यहां तीन नाबालिग बहनों की एक साथ मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। हालांकि मामले की जांच जारी है, लेकिन शुरुआती तथ्यों में बच्चों की डिजिटल दुनिया से अत्यधिक जुड़ाव की बात सामने आ रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि आज बच्चों की दुनिया एक छोटी-सी स्क्रीन में सिमटती जा रही है। मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं। समय रहते अगर सतर्कता नहीं बरती गई, तो यह डिजिटल दुनिया बच्चों की जान की दुश्मन बन सकती है।यह रिपोर्ट माता-पिता, समाज और सिस्टम—तीनों के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल पर नजर रखना अब विकल्प नहीं, जरूरत बन चुका है।

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