सिम चालू रखना मजबूरी या ज़रूरत ? राघव चड्ढा ने संसद में टेलीकॉम कंपनियों की नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha ने संसद में टेलीकॉम कंपनियों की उस नीति पर सवाल उठाए, जिसके तहत रिचार्ज समाप्त होते ही इनकमिंग कॉल और एसएमएस सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सीधे तौर पर आम नागरिकों, खासकर गरीब और दिहाड़ी मजदूर वर्ग की डिजिटल पहुंच को प्रभावित करती है।चड्ढा ने सदन में कहा कि आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और पहचान सत्यापन का अहम साधन बन चुका है। ऐसे में इनकमिंग कॉल और एसएमएस सेवाओं को बंद करना लोगों को जरूरी सेवाओं से वंचित करने जैसा है।गरीब और मजदूर वर्ग पर असर

सांसद ने बताया कि देश में बड़ी संख्या में लोग अब भी कीपैड मोबाइल का उपयोग करते हैं, ताकि बैंकिंग ओटीपी और सरकारी संदेश प्राप्त कर सकें। यदि रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग एसएमएस बंद हो जाता है, तो बैंक लेन-देन, सब्सिडी और अन्य जरूरी कार्य बाधित हो सकते हैं।उन्होंने कहा, “आउटगोइंग कॉल रोकना बिज़नेस का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इनकमिंग सेवा बंद करना एक गरीब व्यक्ति को दुनिया से काट देने जैसा है।”मुनाफे की रणनीति पर सवालराघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां औसत प्रति उपयोगकर्ता राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिए ग्राहकों को बार-बार ‘मिनिमम रिचार्ज’ कराने के लिए मजबूर करती हैं। उनका कहना है कि यह नीति उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इसकी समीक्षा होनी चाहिए।सरकार और TRAI से मांगसांसद ने केंद्र सरकार और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) से अपील की कि इनकमिंग कॉल और एसएमएस सेवाओं को बुनियादी डिजिटल जरूरत के रूप में मान्यता दी जाए। उन्होंने मांग की कि रिचार्ज समाप्त होने पर भी कम से कम इन सेवाओं को चालू रखने की नीति बनाई जाए।इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग के साथ उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल कनेक्टिविटी को विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यक सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए।



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