धनंजय सिंह पर हमले के मामले में विधायक अभय डॉक्टर और फार्मासिस्ट कोर्ट में तलब

जौनपुर। करीब 24 वर्ष पुराने बहुचर्चित गोलीकांड मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए विधायक अभय, संबंधित डॉक्टर और फार्मासिस्ट को तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली निर्धारित तिथि पर सभी को उपस्थित होना अनिवार्य होगा। जिरह की प्रक्रिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाएगी, जिससे सुनवाई में तेजी लाई जा सके।क्या है पूरा मामला?यह मामला वर्ष 2002 का बताया जा रहा है, जब धनंजय पर जानलेवा हमला हुआ था। घटना के दौरान कई राउंड गोलियां चली थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। हमले के पीछे राजनीतिक रंजिश को प्रमुख कारण माना गया था।घटना के बाद मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं और तकनीकी कारणों से सुनवाई लंबी खिंचती रही। अब अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लंबित गवाहियों और साक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट की भूमिका क्यों अहम?


सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और प्रमाण पत्र इस केस में महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। इसी कारण अदालत ने संबंधित डॉक्टर और फार्मासिस्ट को भी गवाही के लिए तलब किया है।अभियोजन पक्ष का मानना है कि मेडिकल साक्ष्य से घटना की परिस्थितियों और हमले की गंभीरता को स्पष्ट किया जा सकेगा।अदालत का सख्त रुख अदालत ने कहा है कि सभी संबंधित पक्ष निर्धारित तिथि पर अनिवार्य रूप से उपस्थित हों।जिरह की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय से लंबित इस मामले में अब शीघ्र निर्णय की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं राजनीतिक हलचल तेजकोर्ट के आदेश के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने निष्पक्ष सुनवाई और समयबद्ध निर्णय की मांग की है। वहीं समर्थकों का कहना है कि अदालत में सच्चाई सामने आ जाएगी।स्थानीय लोगों का मानना है कि इतने पुराने मामले में सुनवाई तेज होना न्याय व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।आगे क्या?अगली सुनवाई में गवाहों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। यदि सभी पक्ष उपस्थित होते हैं, तो यह मामला अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है।24 साल पुराने इस बहुचर्चित केस पर अब सभी की नजरें अदालत की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। 



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