हर-हर महादेव के जयघोष संग शुरू हुई काशी की पंचकोशी यात्रा, नंगे पाँव श्रद्धालु करेंगे शिव परिक्रमा

महाशिवरात्रि से पूर्व काशी की प्राचीन और अत्यंत पावन पंचकोशी यात्रा का शुभारम्भ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हो गया। शिवमय काशी में यह परिक्रमा विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है, जिसमें नगर सहित दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु नंगे पाँव लगभग पाँच कोस (करीब 70–80 किलोमीटर) की परिधि पूर्ण करते हैं।यात्रा की शुरुआत श्रद्धालुओं द्वारा मणिकर्णिका घाट पर पवित्र स्नान से होती है। विश्व कल्याण की कामना के उपरांत श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ का विधिवत दर्शन-पूजन कर पंचकोशी परिक्रमा का संकल्प लेते हैं। हर-हर महादेव के उद्घोष से संपूर्ण काशी भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठती है।

परंपरानुसार पंचकोशी यात्रा पाँच प्रमुख पड़ावों से होकर गुजरती है—

प्रथम पड़ाव: कर्दमेश्वर महादेव मंदिर (कंदवा)

द्वितीय पड़ाव: भीमचंडी देवी मंदिर

तृतीय पड़ाव: रामेश्वर महादेव मंदिर

चतुर्थ पड़ाव: शिवपुरेश्वर महादेव मंदिर

पंचम पड़ाव: कपिलधारा तीर्थ

श्रद्धालु इन सभी तीर्थों में दर्शन-पूजन करते हुए पुनः काशी लौटते हैं और अंत में पुनः काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के अंतिम दर्शन के साथ यात्रा सम्पन्न करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पंचकोशी परिक्रमा से पापों का क्षय होता है और शिवकृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विश्राम, जलपान, भोजन तथा प्राथमिक चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रशासन भी सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर सतर्क है।आस्था, अनुशासन और सनातन संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरती यह पंचकोशी यात्रा काशी की जीवंत धार्मिक विरासत का प्रतीक है, जो देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत करती है।

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