काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विशेष बीएचयू निवासी डॉ. ओम शंकर ने विश्वविद्यालय परिसर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थान पर कैंटीन संचालन का विरोध करते हुए इसे गंभीर सुरक्षा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि कैंपस में पर्याप्त खाली स्थान उपलब्ध होने के बावजूद जानबूझकर भीड़भाड़ वाली जगह पर कैंटीन चलाई जा रही है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।डॉ. ओम शंकर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में कुलपति महोदय की तानाशाही के चलते सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। हाल ही में फायर विभाग के अधिकारियों द्वारा कैंटीन एवं मेस परिसर की जांच भी की गई थी, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि बीएचयू में जिस प्रकार की अराजक और लापरवाह परिस्थितियाँ बना दी गई हैं, वे किसी भी जिम्मेदार शैक्षणिक संस्थान के लिए शर्मनाक हैं। सवाल यह नहीं है कि हादसा होगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि हादसा कब होगा।डॉ. ओम शंकर ने बताया कि मेस परिसर में गैस सिलेंडरों को असुरक्षित तरीके से ढेर के ढेर रखा गया है, जो एक चलते-फिरते टाइम बम की तरह है। उन्होंने इसे प्रशासन की घोर लापरवाही बताते हुए कहा कि इतने बड़े खतरे के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है।उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होती है और जान-माल की क्षति होती है, तो इसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन, सर सुंदरलाल चिकित्सालय के एमएस तथा मेस प्रबंधन की होगी। बाद में जांच बैठाने या फाइलें चलाने से किसी की जान वापस नहीं आएगी।
डॉ. ओम शंकर ने एमएस कार्यालय के ठीक सामने स्थित भुजवल/भुसावल पेक्षागिरी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जिसे एक आदर्श आवासीय एवं भोजन व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा सकता था, वह आज प्रशासनिक उपेक्षा, गंदगी और बदहाली का प्रतीक बन चुका है। यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।उन्होंने दो टूक कहा कि अब चेतावनी देने का समय समाप्त हो चुका है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, ताकि बाद में जिम्मेदारी से बचा जा सके।

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