एक धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने गौ संरक्षण के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “जो गौ माता के साथ नहीं है, वह कसाई के समान है।” उनके इस बयान के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।सभा के दौरान उन्होंने संत समाज से सीधा सवाल किया कि वे “गाय के साथ हैं या आय (आर्थिक लाभ) के साथ?” उन्होंने गौ संरक्षण को धर्म और संस्कृति से जुड़ा विषय बताते हुए इसे आस्था का प्रश्न बताया। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गौ रक्षा के मुद्दे की अनदेखी की गई तो इसे “धर्म युद्ध” का रूप भी दिया जा सकता है।सभा में क्या कहा गया?शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की आधारशिला हैं। उन्होंने संतों और धार्मिक संगठनों से आह्वान किया कि वे गौ संरक्षण के लिए एकजुट हों और समाज में जागरूकता फैलाएं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाइस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था का विषय बताया, जबकि कुछ ने इस प्रकार की भाषा पर आपत्ति जताई है।आगे क्या?गौ संरक्षण का मुद्दा पहले भी राष्ट्रीय बहस का विषय रहा है। शंकराचार्य के इस बयान के बाद एक बार फिर यह विषय सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रशासन और राजनीतिक वर्ग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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