देशभर के विश्वविद्यालयों में शोधरत विद्यार्थियों को दी जाने वाली NON-NET FELLOWSHIP की धनराशि में वृद्धि की मांग को लेकर शोधार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। अभियान के माध्यम से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), नई दिल्ली को एक ज्ञापन सौंपते हुए मौजूदा फेलोशिप राशि को अपर्याप्त और अन्यायपूर्ण बताया गया।ज्ञापन में शोधार्थियों ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में NON-NET FELLOWSHIP की राशि मात्र 8,000 रुपये प्रतिमाह है, जिसका निर्धारण वर्ष 2008 की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप किया गया था। जबकि वर्तमान समय में महंगाई, आवास, भोजन, शोध सामग्री और अन्य आवश्यक खर्चों को देखते हुए यह राशि पूरी तरह नाकाफी है। दूसरी ओर JRF की राशि में पिछले एक दशक में लगातार वृद्धि हुई है और वर्तमान में यह HRA सहित लगभग 45,000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच चुकी है।
शोधार्थियों ने आरोप लगाया कि बीते दो दशकों से NON-NET FELLOWSHIP में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे पूर्णकालिक शोध कार्य कर रहे विद्यार्थियों को गंभीर आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसका सीधा प्रभाव शोध कार्य की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा के भविष्य पर पड़ रहा है।हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से UGC से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली, NON-NET FELLOWSHIP की वर्तमान राशि 8,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 25,000 रुपये प्रतिमाह की जाए। दूसरी, फेलोशिप राशि को महंगाई सूचकांक से जोड़ा जाए ताकि समय-समय पर स्वतः वृद्धि हो सके। तीसरी, देश के सभी केन्द्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में प्रत्येक शोधार्थी को NON-NET FELLOWSHIP से जोड़ा जाए।शोधार्थियों का कहना है कि देश की प्रगति और उच्च शिक्षा का भविष्य गुणवत्तापूर्ण शोध पर निर्भर करता है, और इसके लिए शोधार्थियों को सम्मानजनक आर्थिक सहयोग मिलना आवश्यक है। उन्होंने UGC से मांग की कि शोधार्थियों की समस्याओं और चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस और सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

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