कानपुर से संचालित एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने देश के 9 राज्यों तक अपना जाल फैला रखा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट के सरगना ने खुद को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विशेषज्ञ बताकर चार देशों के राष्ट्रपतियों से मुलाकात करने का दावा भी किया था।जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्री बेचने से होने वाली कमाई का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कथित “यूनिवर्सिटी” के नाम पर लिया जाता था, जबकि बाकी रकम एजेंट और नेटवर्क में जुड़े लोग बांट ले ऐसे चलता था फर्जीवाड़े का खेलसूत्रों के मुताबिक, गिरोह सोशल मीडिया, वेबसाइट और एजेंटों के जरिए छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को टारगेट करता था।10वीं, 12वीं से लेकर बीए, एमए, बीटेक और यहां तक कि पीएचडी तक की डिग्रियां तैयार की जाती थीं।
फर्जी मार्कशीट, ट्रांसक्रिप्ट और वेरिफिकेशन लेटर भी दिए जाते थे। कुछ मामलों में नकली दीक्षांत समारोह की तस्वीरें और वीडियो भी बनाए गए।जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने कई राज्यों में फ्रेंचाइजी मॉडल पर एजेंट नियुक्त कर रखे थे, जो हर एडमिशन पर कमीशन पाते थे।9 राज्यों तक फैला नेटवर्कपुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और महाराष्ट्र में इस गिरोह के संपर्क मिले हैं।एजेंसियों का कहना है कि फर्जी यूनिवर्सिटी के नाम पर वेबसाइट बनाकर छात्रों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि संस्थान विदेशी मान्यता प्राप्त है।4 देशों के राष्ट्रपतियों से मिलने का दावागिरोह का सरगना खुद को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मंचों से जुड़ा बताता था। उसने सोशल मीडिया पर विदेशी नेताओं और राष्ट्रपतियों के साथ तस्वीरें साझा कर अपनी साख बनाने की कोशिश की। जांच एजेंसियां अब इन दावों की सत्यता की जांच कर रही हैं।
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