करीब 25 साल पहले लापता हुई एक महिला हाल ही में अपने परिवार से मिली, लेकिन यह भावुक मिलन ज्यादा समय तक खुशियां नहीं ला सका। धर्म परिवर्तन को लेकर मतभेद के कारण महिला को अपने ही बेटे के घर से वापस लौटना पड़ा। यह घटना समाज में धार्मिक पहचान और पारिवारिक रिश्तों के बीच खिंचाव को लेकर नई बहस छेड़ रही है।कैसे बिछड़ा था परिवार?जानकारी के अनुसार, महिला वर्ष 2001 में पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद परिवार ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।हाल ही में एक सामाजिक संगठन की मदद से महिला का पता चला। डीएनए जांच और स्थानीय प्रशासन की पुष्टि के बाद परिवार और महिला की पहचान सुनिश्चित हुई।भावुक मुलाकात, फिर बढ़ा विवादपरिवार से मिलन का दृश्य भावुक था। बेटे और अन्य रिश्तेदारों ने महिला का स्वागत किया। हालांकि, कुछ ही दिनों में धार्मिक पहचान को लेकर मतभेद सामने आ गए।
परिजनों का कहना है कि महिला ने वर्षों पहले अपना धर्म बदल लिया था और वह उसी आस्था में रहना चाहती थी। बेटे ने कथित तौर पर शर्त रखी कि वह घर में तभी रह सकती है जब वह पुनः हिंदू धर्म अपना ले। महिला ने अपनी वर्तमान आस्था छोड़ने से इनकार कर दिया।बेटे का रुख स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बेटे का कहना है कि परिवार की सामाजिक स्थिति और परंपराओं को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक था। हालांकि, उसने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है।महिला का पक्ष महिला ने कहा कि वह अपने बेटे और परिवार से मिलकर खुश थी, लेकिन अपनी आस्था से समझौता नहीं कर सकती। “मैंने 25 साल अपने विश्वास के साथ बिताए हैं। अब सिर्फ रहने के लिए उसे नहीं छोड़ सकती,” उसने कहा।समाज में उठे सवाल इस घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता, पारिवारिक स्वीकृति और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी वयस्क को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है और पारिवारिक रिश्तों को इस आधार पर नहीं तोड़ा जाना चाहिए।वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए।प्रशासन की भूमिकास्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि महिला बालिग है और उसे अपनी पसंद से रहने का पूरा अधिकार है। फिलहाल महिला एक सामाजिक संगठन की देखरेख में रह रही है।

