दशाश्वमेध घाट पर होली: गीत में सजे ज्वलंत मुद्दे, सुर और व्यंग्य का संगम

होली के पावन अवसर पर दशाश्वमेध घाट का नज़ारा इस बार भी निराला रहा। गंगा तट पर बनारसियों का अलग-अलग अंदाज़ और मिज़ाज देखने को मिला—कहीं भंग-ठंडई की महक, कहीं सिलबट्टे पर घुटती भंग, तो कहीं पिचकारी, अबीर-गुलाल और रंग-बिरंगी टोपियों के साथ ठेठ बनारसी ठाठ।गीतकार कन्हैया दुबे ‘केडी’ के संयोजन में कलाकारों की टोली गंगा किनारे पहुंची और हारमोनियम, तबला व ढोलक की थाप पर जोगीरा के रंग जमाए। 

कार्यक्रम में समसामयिक ज्वलंत मुद्दों—साधु-सन्यासी, नेता-अभिनेता, यूजीसी से जुड़े विषयों और हाल ही में दुकान में हुई चोरी—पर चुटीले अंदाज़ में तंज कसा गया। अमलेश शुक्ला और बाल कलाकार यथार्थ दुबे ने व्यंग्य और सुरों से सजी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।इस दौरान ‘बनारसी भांग’ की व्यवस्था प्रभाकर यादव द्वारा की गई, जो सिलबट्टे पर भंग पीसते नजर आए। प्रसिद्ध तबला वादक दीपक सिंह ने तबले पर, नसीम ने ढोलक पर और दयानंद ने हारमोनियम पर संगत कर कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया।



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