वाराणसी में गंगा घाट पर इफ्तार को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि “गंगा पर इफ्तार क्यों नहीं कर सकते?”जानकारी के अनुसार, कुछ युवक गंगा घाट पर इफ्तार का आयोजन करने पहुंचे थे, लेकिन बिना पूर्व अनुमति के आयोजन होने की वजह से प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए इसे रुकवा दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि घाटों पर किसी भी तरह के सार्वजनिक या धार्मिक आयोजन के लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य है, ताकि कानून-व्यवस्था और व्यवस्था बनाए रखी जा सके।इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि “लगता है युवकों ने हथेली गरम नहीं की होगी, इसलिए उन पर कार्रवाई की गई।” उनके इस बयान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और इसका किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण मानसिकता से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर आयोजन के लिए बनाए गए नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं।इस घटना के बाद से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और कुछ अन्य पक्ष इसे कानून-व्यवस्था और नियमों के पालन का मामला बता रहे हैं।स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता का मामला मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी आयोजन के लिए नियमों का पालन जरूरी है।फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है, और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

