चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर काशी में उमड़ी आस्था, माँ शैलपुत्री का दर्शन कर भक्त हुए निहाल

चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही पावन पर्व चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष यानी हिन्दू नवसंवत्सर की शुरुआत हो गई है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। धर्म नगरी काशी के अलईपुरा स्थित शैलपुत्री देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज से पहुंचे भक्त मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।चैत्र नवरात्रि को हिन्दू नवसंवत्सर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नए संकल्प और आध्यात्मिक जागरण का आरंभ है। वाराणसी में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलग-अलग मंदिर हैं, जहां नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है।पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना का विशेष महत्व है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां वृषभ पर सवार होकर दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। मान्यता है कि इनके पूजन से मूलाधार चक्र जागृत होता है, जिससे जीवन में स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां शैलपुत्री ही पूर्व जन्म में सती थीं, जिन्होंने भगवान शिव के सम्मान के लिए यज्ञ कुंड में देह त्याग दी थी और पुनः हिमालय के घर जन्म लेकर कठोर तपस्या के बाद शिव को पुनः प्राप्त किया। इसलिए इनके दर्शन से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।अलईपुरा स्थित प्राचीन शैलपुत्री मंदिर में नवरात्र के पहले दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त नारियल और गुड़हल का फूल अर्पित कर मां से अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। कलश स्थापना के साथ ही विधिवत पूजा शुरू हो चुकी है।मंदिर के महंत जीयुत तिवारी के अनुसार, मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत शांत और कल्याणकारी है, जो अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।



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