लखनऊ में 19वीं रमजान का मातमी जुलूस, काले कपड़ों में उमड़े हजारों अकीदतमंद

लखनऊ,रमजान की 19वीं तारीख पर सोमवार को लखनऊ में शिया समुदाय का पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला गया। हजरत अली की शहादत की याद में निकले इस जुलूस में हजारों अकीदतमंद काले कपड़े पहनकर शामिल हुए और मातम करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। ताबूत छूने के लिए लगी भीड़ जुलूस में शामिल लोग “या अली” और “या हुसैन” के नारे लगाते हुए आगे बढ़े। कई जगहों पर श्रद्धालु ताबूत को छूने, चूमने और उसके पास दुआ करने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। अकीदतमंदों में ताबूत तक पहुंचने की होड़ भी देखी गई।  कूफा मस्जिद से शुरू हुआ जुलूस यह जुलूस सआदतगंज स्थित कूफा मस्जिद से शुरू होकर पुराने लखनऊ के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए चौक क्षेत्र के इमामबाड़ा तकि जैदी तक पहुंचा। जुलूस से पहले मस्जिद में मजलिस आयोजित की गई, जिसमें धार्मिक विद्वानों ने हजरत अली की शहादत से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया।


भारी सुरक्षा व्यवस्था जुलूस को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। अधिकारियों के अनुसार जुलूस में हजारों लोगों की भीड़ शामिल हुई और इसे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।  क्यों निकलता है यह जुलूस इस्लामी इतिहास के अनुसार रमजान की 19वीं तारीख को हजरत अली पर हमला हुआ था और दो दिन बाद 21 रमजान को उनकी शहादत हुई। शिया समुदाय हर साल इसी घटना की याद में मातमी जुलूस निकालकर गम और श्रद्धा व्यक्त करता है।

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