भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि: कल्पक्कम में 500 मेगावाट फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ‘क्रिटिकल’, दुनिया में दूसरा स्थान

भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने घोषणा की कि तमिलनाडु के Kalpakkam में स्थापित 500 मेगावाट का स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकल’ हो गया है।इस उपलब्धि के साथ भारत, Russia के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसके पास व्यावसायिक स्तर का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालन की क्षमता है। वहीं China का CFR-600 रिएक्टर अभी प्रदर्शन (डेमोन्स्ट्रेशन) चरण में है।

क्या है इस रिएक्टर की खासियत?

यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अपनी अनूठी तकनीक के लिए जाना जाता है, क्योंकि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा भी करता है। यह यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदलकर नया ईंधन तैयार करता है, जिसे ‘ब्रीडिंग’ कहा जाता है।यह रिएक्टर सालाना लगभग 3500 गीगावॉट-घंटे बिजली उत्पादन करने में सक्षम है, जो किसी Indore जैसे मध्यम आकार के शहर की वार्षिक बिजली आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।

स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता

इस परियोजना को BHAVINI (भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड) और Department of Atomic Energy के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दशकों की मेहनत से तैयार किया है। इसमें सोडियम कूलेंट, मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन और उन्नत सुरक्षा प्रणालियां पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं।

भारत के भविष्य के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। भारत के पास विश्व का लगभग 25% थोरियम भंडार है, जिससे भविष्य में तीसरे चरण के तहत थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 25–30 वर्षों में यह तकनीक भारत को सस्ती, स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बना सकती है।


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