तीन मंच, 225 कलाकार, हाथी-घोड़े और भव्य दृश्य—काशी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य ने रचा इतिहास

वाराणसी में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव की अद्भुत झलक प्रस्तुत करता तीन दिवसीय ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महोत्सव का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को बीएलडब्ल्यू स्थित सूर्य सरोवर मैदान में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संयुक्त रूप से किया।इस अवसर पर काशी की पावन धरती पर महाकाल की भस्म आरती की दिव्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। भव्य मंच सज्जा, पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और गौरव से भर गया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को न्याय, धर्म और लोककल्याण का प्रतीक बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय समाज में खलनायकों को हीरो के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास हुआ, लेकिन अब समय बदल रहा है।

वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में सम्राट विक्रमादित्य को भारतीय इतिहास का महान शासक बताते हुए कहा कि उनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयासों से पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात भी कही।महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका भव्य और जीवंत मंचन रहा। आयोजन स्थल पर एक साथ तीन विशाल मंच तैयार किए गए, जिन पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। लगभग 225 कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम में हाथी, घोड़े, रथ, ऊँट और पालकी के साथ युद्ध दृश्य, लाइट शो, आतिशबाजी और विशेष प्रभावों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। घोड़ों की टाप और युद्ध के दृश्य ने दर्शकों में रोमांच भर दिया, जबकि हाथी की गरिमामयी उपस्थिति ने प्राचीन भारत की झलक को जीवंत कर दिया।हजारों की संख्या में उपस्थित दर्शकों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया। कई लोगों ने इसे “लाइव इतिहास की किताब” करार दिया, जहां उन्होंने इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटित होते देखा।यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि भारतीय संस्कृति, न्याय व्यवस्था और आदर्श शासन प्रणाली को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास भी है।



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