वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने जिले के कुख्यात अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए टॉप-10 अपराधियों की सूची को अपडेट किया है। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ‘यक्ष’ ऐप के जरिए इन अपराधियों का विस्तृत आपराधिक ब्योरा तैयार किया गया है।पुलिस के अनुसार, सूची में शामिल एक शातिर अपराधी अभी भी फरार है, जबकि चार आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं और पांच अपराधी फिलहाल जेल में निरुद्ध हैं।
एक अपराधी लापता, तलाश जारी
आदमपुर थाना क्षेत्र के कोयला बाजार निवासी अजय चौहान का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी है कि वह जीवित है या नहीं।
जोनवार अपराधियों की सूची
टॉप-10 सूची में काशी जोन से अजय चौहान और प्रवीण मिश्रा शामिल हैं। वरुणा जोन से फहीम अंसारी उर्फ रिंकू, गोलू यादव उर्फ सुदीप/संदीप, अभिषेक सिंह उर्फ हनी/जहर/राहुल, राजेश सिंह उर्फ बंटी और श्रीप्रकाश मिश्रा उर्फ झुन्ना पंडित को जगह दी गई है। वहीं गोमती जोन से सिज्जन यादव, शिवशंकर सेठ उर्फ बाबू सेठ और मुलायम उर्फ महंगी यादव को सूची में शामिल किया गया है।
जमानत और जेल की स्थिति
इनमें से फहीम अंसारी, सिज्जन यादव, शिवशंकर सेठ और मुलायम यादव जमानत पर जेल से बाहर हैं, जबकि बाकी पांच अपराधी जेल में बंद हैं।
मुकदमों की लंबी फेहरिस्त
इन अपराधियों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या काफी अधिक है। अजय चौहान पर 24, प्रवीण मिश्रा पर 21, फहीम अंसारी पर 29, गोलू यादव पर 38, अभिषेक सिंह पर 36, राजेश सिंह पर 44, श्रीप्रकाश मिश्रा पर 50, सिज्जन यादव पर 29, शिवशंकर सेठ पर 17 और मुलायम यादव पर 35 मुकदमे दर्ज हैं।
हिस्ट्रीशीट और संपत्ति जब्ती
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 10 में से 9 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी है, जबकि मुलायम उर्फ महंगी यादव की हिस्ट्रीशीट अभी तक नहीं खुली है।गैंगस्टर एक्ट के तहत तीन अपराधियों—अभिषेक सिंह उर्फ हनी, शिवशंकर सेठ (बाबू सेठ) और मुलायम यादव—की संपत्ति जब्त की गई है। इसमें हनी की लगभग 60 लाख रुपये, बाबू सेठ की 3.59 करोड़ रुपये से अधिक और मुलायम यादव की करीब सवा चार लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है।
यक्ष’ ऐप में 17 हजार से अधिक अपराधियों का डेटा
कमिश्नरेट पुलिस ने ‘यक्ष’ ऐप में जिले के 17,140 अपराधियों का डेटा तैयार किया है। इस डेटा में उनके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ लोकेशन, मोहल्ला सत्यापन, बीट, चौकी और जियो-टैगिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई हैं।पुलिस का कहना है कि इस पहल से अपराधियों की निगरानी और गिरफ्तारी में तेजी आएगी, साथ ही कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

