बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने सनातन धर्म, मंदिर व्यवस्था और धार्मिक चेतना से जुड़े मुद्दों को लेकर वाराणसी में दो दिवसीय उपवास रखा।मीडिया से बातचीत में डॉ. सुनील कुमार ने दावा किया कि 1 अप्रैल 2025 से ‘कल्कि भगवान’ की चेतना जागृत हो चुकी है, लेकिन अधिकांश सनातनी समाज और धार्मिक अधिकारी इससे अनभिज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि इस चेतना को मानव समाज से जोड़ना समय की आवश्यकता है, जबकि कुछ लोग इसका अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
उन्होंने दक्षिण भारत के मंदिरों की व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि मंदिरों में ऐसे लोगों की भागीदारी बढ़ रही है, जिनकी धार्मिक आस्था और मान्यताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे पारंपरिक पूजा-पद्धतियों पर प्रभाव पड़ रहा है।डॉ. सुनील कुमार ने वैष्णव और शैव पंथ के कुछ आध्यात्मिक पदाधिकारियों पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि धर्म और समाज के बीच सेतु बनने के बजाय कई लोग अपनी जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं।
काशी को धर्मनगरी बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों और धार्मिक नेतृत्व को इन विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन तैयार किया जा रहा है, जिसे जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजा जाएगा।


