हीट वेव बन रही गंभीर खतरा, डॉक्टरों ने दी धूप से बचने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण हीट वेव यानी लू का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर धार्मिक नगरी वाराणसी में भी साफ दिखाई देने लगा है। भीषण गर्मी के चलते काशी के प्रमुख घाटों पर दिन के समय सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।इस संबंध में डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि मई और जून के महीनों में हीट वेव का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलता है। अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर का तापमान नियंत्रित रखना कठिन हो जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, किसान, मजदूर तथा हृदय रोग, डायबिटीज और हाई बीपी से पीड़ित लोग इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।डॉ. द्विवेदी के अनुसार लू लगने पर तेज सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक प्यास, कमजोरी, उल्टी, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर ठंडे पानी की पट्टियां करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हीट वेव से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। ORS, नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक धूप में निकलने से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय सिर को ढकना और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना लाभदायक होता है।भीषण गर्मी का असर काशी के घाटों पर भी देखने को मिल रहा है। सामान्य दिनों में जहां घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ रहती है, वहीं दोपहर के समय अब कई घाट सूने दिखाई दे रहे हैं। गर्म हवाओं और तपती सीढ़ियों के कारण लोग सुबह और शाम के समय ही घाटों की ओर रुख कर रहे हैं।उन्होंने किसानों और मजदूरों को लगातार धूप में काम करने से बचने तथा बीच-बीच में आराम और पानी का सेवन करते रहने की सलाह दी। साथ ही बच्चों को बंद वाहनों में न छोड़ने की अपील की, क्योंकि वाहन के अंदर तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।डॉ. द्विवेदी ने कहा कि हीट वेव से बचाव केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था करना, जरूरतमंदों और बुजुर्गों का ध्यान रखना तथा लोगों को जागरूक करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “सावधानी, पर्याप्त पानी और सही जानकारी ही हीट वेव से सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।”




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