देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। तेल कंपनियों द्वारा कीमतों में करीब 3 रुपये तक की बढ़ोतरी किए जाने के बाद अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की कमजोरी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां फिलहाल सीमित बढ़ोतरी कर रही हैं, लेकिन अगर क्रूड ऑयल के दाम लगातार ऊंचे बने रहे तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी इजाफा देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि कंपनियां चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर बोझ डाल सकती हैं।
बीते कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से तेल आयात महंगा हो गया है। इसका सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि उन्हें लागत और वैश्विक बाजार के हिसाब से कीमतों में बदलाव करना पड़ता है।ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्ट, कृषि, खाद्य सामग्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है।आर्थिक जानकारों के मुताबिक, यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां नहीं सुधरीं और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल आम जनता की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

