वाराणसी में खिला दुर्लभ सहस्त्र दल कमल, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण का बना प्रतीक

वाराणसी में दुर्लभ सहस्त्र दल कमल (1000 पंखुड़ियों वाला कमल) के खिलने से पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का एक अनोखा उदाहरण सामने आया है। सारनाथ निवासी सेवानिवृत्त वन अधिकारी एवं पर्यावरणविद् मदन राम चौरसिया के आउटडोर होम गार्डन में यह दुर्लभ पुष्प सफलतापूर्वक विकसित होकर खिला, जिसे एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।सृजन सामाजिक संस्था के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल बागवानी नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने वाला अभियान है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में घटती हरियाली के बीच ऐसे प्रयास समाज को प्रकृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यह दुर्लभ सहस्त्र दल कमल मार्च 2023 में बेंगलुरु के पास रामनगर स्थित एक्वा फार्म से लाए गए ट्यूबर्स से तैयार किया गया था। प्रारंभिक चरण में यह सारनाथ डियर पार्क और गढ़वा घाट आश्रम में भी खिला था, लेकिन लंबे समय की देखभाल और प्रयासों के बाद अब यह चौरसिया के निजी गार्डन में पूर्ण रूप से विकसित हुआ है।


विशेषज्ञों के अनुसार यह कमल लगभग 20 परतों में व्यवस्थित करीब 1000 पंखुड़ियों वाला पुष्प होता है, जो लंबे समय तक खिला रहता है और अपनी सुगंध के लिए भी जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे सहस्रार चक्र का प्रतीक माना जाता है, जो उच्च चेतना और आध्यात्मिक जागृति का प्रतिनिधित्व करता है।मदन राम चौरसिया का घर आज विविध औषधीय, सजावटी और पर्यावरण हितैषी पौधों का एक जीवंत ग्रीन हाउस बन चुका है, जहाँ 80 से अधिक प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं। वे लंबे समय से काशी में हरियाली बढ़ाने और वर्टिकल गार्डनिंग को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। 


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