बदलते दौर में जहां संयुक्त परिवार तेजी से टूटते जा रहे हैं, वहीं वाराणसी का मौर्य परिवार आज भी पारिवारिक एकता और सामूहिक जीवन की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। विश्व परिवार दिवस के अवसर पर यह परिवार लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। खास बात यह है कि इस परिवार में रोजाना 52 लोगों का खाना एक ही किचन में तैयार होता है।परिवार में हर दिन करीब 300 रोटियां बनाई जाती हैं, जबकि लगभग पांच किलोग्राम चावल पकता है। सुबह की चाय के लिए 10 लीटर दूध इस्तेमाल होता है। एक समय का भोजन तैयार करने में करीब साढ़े तीन घंटे लगते हैं।
अकथा स्थित इस विशाल मकान में 40 से अधिक कमरे और एक बड़ा डायनिंग हॉल है, जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करते हैं। परिवार के सदस्य और अशोका इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के वाइस चेयरमैन अमित मौर्य ने बताया कि सुबह 6 बजे से नाश्ता और भोजन बनना शुरू हो जाता है, जो सुबह 9:30 बजे तक तैयार हो जाता है।वहीं रात के खाने की तैयारी शाम 3:30 बजे से शुरू होकर रात 7 बजे तक पूरी होती है। भोजन बनने के बाद सबसे पहले बच्चे एक साथ खाना खाते हैं, फिर महिलाएं और उसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं।परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य लालमनी देवी के मार्गदर्शन में पूरा परिवार संचालित होता है। घर में क्या बनेगा, इसका फैसला भी वही करती हैं। पूरा परिवार शाकाहारी है और नवरात्र के दौरान बिना लहसुन-प्याज का भोजन बनाया जाता है।
मौर्य परिवार के सदस्य बताते हैं कि चाहे कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, भोजन के समय सभी लोग एक साथ बैठना नहीं भूलते। यही पारिवारिक एकता इस परिवार को खास बनाती है और समाज के लिए प्रेरणा भी
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