अलीगढ़ में अवैध रोहिंग्या नेटवर्क पर बढ़ी सख्ती, मीट इंडस्ट्री से लेकर सोने की तस्करी तक जांच तेज

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या नागरिकों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी तेज हो गई है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, 2009-10 में मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के विस्तार के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या परिवार अलीगढ़ पहुंचे और मीट फैक्ट्रियों में मजदूरी व ठेकेदारी से जुड़ गए। शुरुआती वर्षों में जिले में 246 पंजीकृत रोहिंग्या थे, लेकिन कार्रवाई और सत्यापन अभियान के बाद अब सरकारी रिकॉर्ड में केवल 8 पंजीकृत रोहिंग्या ही दर्ज हैं।हाल ही में एसआईबी ने अलम्मार फ्रोजन फूड्स एक्सपोर्ट के तीन ठिकानों पर छापेमारी की। प्राथमिक जांच में दो करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार पर जीएसटी चोरी के संकेत मिले हैं। फर्म को नोटिस जारी किया गया है और शामली व गाजियाबाद स्थित शाखाओं के दस्तावेज भी जांच के दायरे में लाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कर चोरी के खिलाफ आगे भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जून 2021 में एटीएस ने दो रोहिंग्या भाइयों को सोने की तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं, हालिया ईडी जांच में विदेशी फंडिंग के जरिए अवैध घुसपैठ और रोजगार उपलब्ध कराने वाले एक सिंडिकेट के संकेत मिले हैं। जांच में अलीगढ़, बरेली और सहारनपुर के मीट कारखानों में अवैध घुसपैठियों को काम दिलाने की बात भी सामने आई है।इसके अलावा, पिछले वर्ष पुलिस ने अलीगढ़ के एक ईंट-भट्ठे से पांच बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। वहीं, बाढ़ पीड़ितों के नाम पर चंदा मांगने वाली संदिग्ध युवतियों का मामला भी जांच के दायरे में है। पुलिस किरायेदारों का सत्यापन अभियान चला रही है, जबकि खुफिया एजेंसियां सभी पंजीकृत रोहिंग्या के बायोमीट्रिक डेटा के आधार पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।इस मामले में कई जांच अभी जारी हैं। विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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