वाराणसी में अफगानी नागरिक बताकर जेल भेजे गए अब्दुल रहमान ताराकी को अदालत से राहत मिल गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने पासपोर्ट अधिनियम, आजोजन एवं विदेशी अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में आरोपी को जमानत दे दी। अदालत ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की प्रतिभूति प्रस्तुत करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट में भारतीय नागरिक होने के दस्तावेज पेश किए
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोपी को अफगानी नागरिक बताए जाने पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष आरोपी की पहचान और नागरिकता से संबंधित दस्तावेज पेश किए। साथ ही अभियोजन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी की वास्तविक पहचान और नागरिकता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि रिकॉर्ड में एक स्थान पर पहचान सय्यद खान के रूप में दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि आरोपी की पहचान अब्दुल रहमान ताराकी पुत्र अब्दुल अजीज के रूप में बताई गई है।
कोर्ट में भारतीय नागरिक होने के दस्तावेज पेश किए
अभियोजन ने जमानत अर्जी का विरोध किया। अभियोजन की ओर से कहा गया कि विवेचक की रिपोर्ट के पैरा-06 में आरोपी के कथन के आधार पर उसके पास अफगानिस्तान का पासपोर्ट होने की बात सामने आई थी।
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अभियोजन ने इमिग्रेशन अधिकारी के हवाले से रहमान शाह को ब्लैकलिस्ट किए जाने संबंधी कथन का भी उल्लेख किया। वहीं बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध करते हुए आरोपी की पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत
अदालत ने बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से इंसाफ चैम्बर के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद नदीम के साथ अधिवक्ता अब्दुल्लाह बिन गफ्फार, जिया उल हक, मोहसिन रजा, तारिक सिद्दीकी और सैफ सिद्दीकी ने पैरवी की।
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