काशी के नाविक समाज ने नौका और मोटर बोट के लाइसेंस दोबारा जारी कराने की मांग को लेकर राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के मंत्री को पत्र भेजा है। माँ गंगा निषादराज सेवा समिति उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ‘गुरु’ ने पत्र के माध्यम से नाविक समाज की समस्याओं से अवगत कराते हुए वर्ष 2024 में नगर निगम वाराणसी द्वारा निरस्त किए गए नौका और मोटर बोट के लाइसेंस तत्काल बहाल कराने की मांग की है।पत्र में कहा गया है कि काशी का नाविक एवं निषाद समाज परंपरागत रूप से लंबे समय से नौकायन के माध्यम से अपनी आजीविका चलाता आ रहा है। समिति का दावा है कि काशी में 40 हजार से अधिक नाविक नौका और मोटर बोट के संचालन से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नाविकों का कहना है कि नौका संचालन उनके परिवारों की आय का प्रमुख साधन है और लाइसेंस निरस्त होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
समिति ने मांग की है कि वर्ष 2024 से निरस्त किए गए नौका और मोटर बोट के पुराने लाइसेंस तत्काल प्रभाव से बहाल कराए जाएं। साथ ही नाविकों को नौका संचालन का लाइसेंस नगर निगम वाराणसी के माध्यम से ही जारी करने की व्यवस्था पूर्व की तरह लागू करने की मांग की गई है। समिति ने यह भी कहा है कि नाविक समाज अपनी नौकाओं के संचालन के लिए परिवहन विभाग अथवा किसी अन्य विभाग से लाइसेंस लेने के बजाय नगर निगम से ही लाइसेंस लेने की पुरानी व्यवस्था चाहता है।पत्र में नाविक समाज ने वाटर टैक्सी के ठेके को बंद कराने की भी मांग उठाई है। समिति का कहना है कि वाटर टैक्सी के संचालन से परंपरागत नाविकों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। पत्र के माध्यम से करीब 40 हजार नाविकों के हित में इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है।
समिति ने यह भी उल्लेख किया कि नाविक समाज लंबे समय से गंगा में यात्रियों की सेवा करता रहा है और डूबते लोगों को बचाना अपना धर्म और कर्तव्य मानता है। वहीं, राज्य सरकार के स्तर से भेजे गए पत्र में भी इस मामले को जनहित से जुड़ा बताते हुए नगर निगम वाराणसी को निर्देशित कर परंपरागत नाविकों के पुराने लाइसेंस बहाल कराने का अनुरोध किया गया है।


