काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आरक्षण के मुद्दे को लेकर NSUI कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता सिंहद्वार पर पहुंचे, जहां पुलिस और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी नोकझोंक हुई। कुछ देर तक मौके पर अफरातफरी की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन में शामिल बीएचयू छात्र सुमन आनंद ने आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की वैधता और प्रवेश प्रक्रिया में निर्धारित समय-सीमा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्रों के लिए तय समय-सीमा के चलते ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक साल पहले या बाद में किसी व्यक्ति की जाति कैसे बदल सकती है। NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रमाणपत्रों की समय-सीमा और प्रवेश प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्यवस्था के कारण पिछड़े वर्ग के कई विद्यार्थी आरक्षण के लाभ से वंचित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षित सीटों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रमाणपत्र या तकनीकी शर्तों के कारण सीटें खाली रह जाने के बाद उन्हें दूसरे वर्ग में दिए जाने की स्थिति बनती है।
सुमन आनंद ने कहा कि पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकार सुरक्षित किए जाने चाहिए और आरक्षण से जुड़े नियमों में स्पष्टता लाई जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रवेश प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी न हो।
सिंहद्वार पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया, जिसके बाद नोकझोंक हुई। NSUI कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन आरक्षण के अधिकार और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है। उन्होंने समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की बात कही।


