पिशाचमोचन कुंड पर ऑनलाइन श्राद्ध पर रोक, प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी

पितृपक्ष के दौरान काशी के पिशाचमोचन कुंड पर देशभर से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने पहुंच रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह स्थान त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। यहां अकाल या असामयिक मृत्यु से जुड़े पितृ कर्म भी कराए जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि विधि-विधान से कर्मकांड करने से पितरों को शांति मिलती है।

इस बार पिशाचमोचन तीर्थ के पुरोहितों और महंत परिवार ने ऑनलाइन श्राद्ध कराने से साफ इनकार किया है। स्क्रीन, वीडियो कॉल या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से यजमान की गैरमौजूदगी में श्राद्ध-पिंडदान नहीं कराया जाएगा। पुरोहितों के मुताबिक श्राद्ध कर्म में यजमान का स्वयं उपस्थित रहना, संकल्प लेना और अपने हाथों से पिंड अर्पित करना जरूरी माना गया है। इसी वजह से ऑनलाइन माध्यम को परंपरा के अनुरूप नहीं माना गया है।


पिशाचमोचन में पितृपक्ष के दौरान खासतौर पर उन परिवारों की भीड़ रहती है, जिनके किसी सदस्य की असामयिक या दुर्घटना में मृत्यु हुई हो। अलग-अलग शहरों और राज्यों से लोग यहां पहुंचकर तर्पण, श्राद्ध और त्रिपिंडी कर्म कराते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार इन कर्मों के जरिए दिवंगत आत्मा की शांति और पितृदोष से मुक्ति की कामना की जाती है।



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