पितृपक्ष को लेकर काशी के प्रसिद्ध पिशाच मोचन कुंड पर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कुंड परिसर में पिंडदान और तर्पण के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कुंड के महंत परिवार की ओर से पूजन-अनुष्ठान की तैयारियां कराई जा रही हैं। वहीं, दूर-दराज से श्रद्धालुओं के वाराणसी पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए पिशाच मोचन कुंड पर विशेष पूजन और पिंडदान का धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। इसी आस्था के चलते पितृपक्ष में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त पूजन-अर्चन और पिंडदान करते हैं।
काशी के पिशाच मोचन कुंड को पितृकर्म के प्रमुख स्थलों में माना जाता है। यहां पितरों की मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता के अनुसार, पितरों का विधिवत श्राद्ध और तर्पण करने से परिवार पर पितृकृपा बनी रहती है। महंत परिवार के अनुसार, पितृपक्ष में यहां होने वाला पूजन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इधर, गंगा घाटों पर भी पितृपक्ष को लेकर पूजन-अर्चन शुरू हो गया है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।


