अंजुमन हैदरी, चौक के तत्वावधान में 114 साल पुराना कदीमी अलम का एहतिजाजी जुलूस निकाला गया। काली महल स्थित शिया मस्जिद से जुलूस की शुरुआत हुई। इससे पहले मौलवी एलिया अजहर ने मजलिस को खिताब करते हुए जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संदेश दिया।
जुलूस नई सड़क, दालमंडी, चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज और मच्छोदरी होते हुए जामिया ईमानिया मुकिमगंज पहुंचा। यहां मौलाना सैय्यद आलिम मेहदी ने कहा कि 114 वर्षों से जारी यह एहतिजाज इस बात का प्रतीक है कि जहां भी इंसानियत पर जुल्म होगा, उसके खिलाफ आवाज बुलंद की जाती रहेगी।
इसके बाद जुलूस नौहा और मातम के साथ तेलियानाला स्थित करारा हाउस पहुंचा। यहां मौलाना इश्तियाक अली ने मजलिस को खिताब करते हुए वर्ष 1912 में तत्कालीन रूस की हुकूमत द्वारा ईरान स्थित हजरत इमाम अली रजा अलैहिस्सलाम के रौजे पर किए गए बम हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करना और मजलूमों के साथ खड़ा होना ही आले मोहम्मद का पैगाम है। इसके बाद अंसार बनारसी ने नौहा पढ़कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
अंजुमन हैदरी के महासचिव नायाब रजा के संयोजन में निकले जुलूस में शहर के विभिन्न इमामबाड़ों से अलम शामिल हुए। नई सड़क स्थित शाहीन हुसैन, कच्ची सराय स्थित जैनुल हसन, पत्थरगली स्थित वक्फ इमामबाड़ा अब्बासी बीबी और अब्बास बेग महशर के इमामबाड़े समेत कई स्थानों से अलम जुलूस में शामिल हुए। इस दौरान जुल्फिकार जैदी, काबे अली, मुहम्मद अली, लियाकत अली, अंसार बनारसी, जेबी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


