वाराणसी के रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन 25 सितंबर से शुरू होगा। UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल यह रामलीला करीब 206 साल पुरानी है। लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में 40 खुले मंचों पर होने वाली इस रामलीला को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। करीब 30 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में मुख्य दिनों में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही जाती है।
रामनगर की रामलीला की खासियत यह है कि इसमें संवाद और पाठ के साथ मंचन होता है और कलाकार माइक्रोफोन का इस्तेमाल नहीं करते। रामचरितमानस के प्रसंगों का पाठ करते हुए कलाकार खुले मंचों पर लीला को जीवंत करते हैं। इसकी पटकथा तुलसीदास के रामचरितमानस पर आधारित है, जिसे 1820 में काशीराज आदित्य नारायण सिंह के बेटे ईश्वरी नारायण सिंह और भारतेंदु हरिश्चंद्र ने तैयार किया था। परंपरा के अनुसार रामनगर के लोग भी पूरे 30 दिनों तक साफ-सुथरे कपड़े, रामचरितमानस की किताब और टॉर्च के साथ रामलीला में शामिल होते हैं।
इस बार रामलीला की शुरुआत रावण जन्म के साथ होगी। पहले दिन रावण जन्म, क्षीर सागर की झांकी, देव स्तुति और आकाशवाणी का मंचन होगा। लीला शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक चलेगी, जबकि भारत मिलाप रात 9 बजे से 12 बजे तक होगा। श्रीराम राज्य की झांकी शाम 5 बजे से सुबह तक निकलेगी। बारिश के कारण किसी दिन लीला नहीं हो पाने पर एक-दो दिन का अतिरिक्त समय रखा जाएगा। रामनगर के काशीनरेश भी पूरे आयोजन के दौरान लीला के साक्षी बनते हैं।


