वाराणसी के रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में मंगलवार को पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का मंचन हुआ। शाम से ही जनकपुर की रंगभूमि श्रद्धालुओं से भरने लगी थी। देश-देशांतर से आए राजाओं ने शिव धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई उसे हिला तक नहीं सका। राजा जनक की निराशा भरी बातों पर लक्ष्मण भी क्रोधित हो उठे। इसके बाद मुनि विश्वामित्र के संकेत पर श्रीराम धनुष उठाने के लिए आगे बढ़े।
रामायणियों के चौपाई गाते ही श्रीराम ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और महज दो सेकंड में उसे बीच से तोड़ दिया। धनुष टूटते ही 36वीं वाहिनी पीएसी परिसर से तोप दागी गई, जिसकी तेज गर्जना से पूरा जनकपुर गूंज उठा। मशाल और पेट्रोमैक्स की दूधिया रोशनी के बीच माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ‘राजा रामचंद्र की जय’ के जयकारे लगाए। रामलीला देखने के लिए शाम सात बजे तक पूरा परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर चुका था।
रात करीब 8:30 बजे धनुष टूटने की आवाज सुनकर परशुराम रंगभूमि में पहुंचे। उनका लक्ष्मण के साथ तीखा संवाद हुआ, जिसके बाद श्रीराम ने शांत भाव से उनसे बात की। श्रीराम द्वारा वैष्णव धनुष चढ़ाने के बाद परशुराम का संशय दूर हुआ और उन्होंने प्रभु की स्तुति की। इसके बाद वे लौट गए। राजा जनक ने अयोध्या में बारात भेजने का निमंत्रण दिया और आरती के साथ रामनगर रामलीला के पांचवें दिन का मंचन संपन्न हुआ।


